Wednesday, January 13, 2010

introduction of a poet inside me

Hi friends
I'm Amrish Joshi "amar". As you can guess from my name I am a poet.
I am new to the blog world and want to use this sphere to share my creative writtings with you all. So please feel free to give your feedback about my poems. To start with this poem.............. I will keenly wait for your feedback
Title : "ना तोड़ नींद मेरी"

ना तोड़ नींद मेरी आँखों में कोई ख्वाब रहने दे,
फलक पे मेरे भी चमकता हुआ आफ़ताब रहने दे !
और अलसाई भोर में देर तलक सोने वाले,
तुझे क्या पता?
कैसे गुजरती है करवटों में रात रहने दे !
ना तोड़ नींद मेरी आँखों में कोई ख्वाब रहने दे,
फलक पे मेरे भी चमकता हुआ आफ़ताब रहने दे !

गिना दी तुने सारी वज़ह वाजिब,
बेरुखी दिखाने की,
हमने भी सोचा चलो अभी,
ठीक नहीं हालात रहने दे !
जब खुलेगी बही तेरे-मेरे रिश्तों की,
उस दिन देखेंगे,
बाकी है अभी कई हिसाब रहने दे!
ना तोड़ नींद मेरी आँखों में कोई ख्वाब रहने दे,
फलक पे मेरे भी चमकता हुआ आफ़ताब रहने दे !

और ले जा तू अपनी निशानियाँ सभी,
वो ख़त, वो तोहफे, वो तस्वीर भी,
बस मेरी किताब में अपनी यादों का
महकता गुलाब रहने दे !
ना तोड़ नींद मेरी आँखों में कोई ख्वाब रहने दे,
फलक पे मेरे भी चमकता हुआ आफ़ताब रहने दे !

अमरीश जोशी "अमर"

6 comments:

  1. Great one!!!
    lage raho bhai !!!

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  2. very nice..........do ur best,gud luck!!!!!!!!!!

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  3. Amazing. It is big and pleasent surprise to me. Dear Ambrish 'Amar'. Now you find the way to remain still 'Amar'.
    Pravin Jain

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  4. ssssssssssssssssshanddddddar ji shandar..............

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